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भारत में LPG संकट 2026: ब्लैक मार्केट में आग, गरीब परिवारों पर बढ़ता बोझ

मार्च 2026 में भारत के कई शहरों में एलपीजी सिलेंडर की कमी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है। देश के कई हिस्सों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव, सप्लाई चेन में बाधा और ब्लैक मार्केटिंग इस संकट को और बढ़ा रहे हैं।


क्यों बढ़ा LPG संकट?

हाल के महीनों में वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में अस्थिरता देखी गई है। मध्य-पूर्व क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण कई देशों में गैस और तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60% से अधिक हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, शिपिंग लागत में वृद्धि, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और सप्लाई में देरी भी कीमतों और उपलब्धता को प्रभावित कर रहे हैं।

देश के कई शहरों में लंबी कतारें

दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, जयपुर और चंडीगढ़ जैसे शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। कई जगहों पर उपभोक्ताओं को सिलेंडर मिलने में 10 से 15 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि गैस की आपूर्ति कम होने के कारण एजेंसियों में रोजाना सीमित सिलेंडर ही उपलब्ध हो पा रहे हैं।

ब्लैक मार्केट में बढ़ी कीमतें

संकट के बीच कई जगहों पर ब्लैक मार्केटिंग भी बढ़ गई है। जहां एक घरेलू सिलेंडर की सरकारी कीमत लगभग ₹900 से ₹950 के आसपास है, वहीं ब्लैक मार्केट में इसे ₹1400 से ₹1600 तक बेचे जाने की खबरें सामने आ रही हैं।

इसी तरह कमर्शियल सिलेंडर की कीमत भी कई शहरों में तेजी से बढ़ी है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ राज्यों में यह कीमत ₹3000 से ₹3200 तक पहुंच गई है।

सबसे ज्यादा प्रभावित गरीब परिवार

एलपीजी संकट का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। कई परिवारों को मजबूरी में लकड़ी और कोयले पर खाना बनाना पड़ रहा है।

सरकार द्वारा दी जाने वाली उज्ज्वला योजना की सब्सिडी के बावजूद कई परिवार बढ़ती कीमतों का बोझ झेल रहे हैं।

रेस्टोरेंट और होटल उद्योग पर असर

एलपीजी की कमी का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है। होटल, ढाबे और छोटे रेस्टोरेंट भी इस संकट से प्रभावित हो रहे हैं।

कई छोटे होटल मालिकों का कहना है कि कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने और समय पर उपलब्ध न होने के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है।

महत्वपूर्ण आंकड़े:
  • भारत अपनी LPG जरूरत का लगभग 60% आयात करता है
  • देश में हर साल लगभग 30 करोड़ से अधिक घरेलू सिलेंडर की खपत
  • उज्ज्वला योजना के तहत 9 करोड़ से अधिक कनेक्शन
  • कमर्शियल सिलेंडर की कीमत कई जगह ₹3000+ तक

सरकार ने क्या कदम उठाए?

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार और तेल कंपनियों ने कई कदम उठाने की घोषणा की है। इनमें शामिल हैं:

  • गैस एजेंसियों पर स्टॉक की निगरानी
  • ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए छापेमारी
  • एलपीजी वितरण को संतुलित करने के लिए इंटर-बुकिंग समय सीमा
  • सप्लाई बढ़ाने के लिए अतिरिक्त आयात

क्या जल्द सुधरेगी स्थिति?

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति स्थिर रहती है तो अगले कुछ हफ्तों में सप्लाई बेहतर हो सकती है।

हालांकि जब तक आयात और वितरण सामान्य नहीं हो जाते, तब तक उपभोक्ताओं को कुछ समय तक इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार भारत को भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए घरेलू ऊर्जा स्रोतों को मजबूत करना और वैकल्पिक ऊर्जा पर अधिक ध्यान देना होगा।

एलपीजी संकट ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि ऊर्जा सुरक्षा किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों के जीवन के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष:
एलपीजी की कमी और बढ़ती कीमतों ने देश के कई हिस्सों में लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों से उम्मीद है कि आने वाले समय में स्थिति सामान्य होगी, लेकिन फिलहाल आम लोगों को राहत मिलने में थोड़ा समय लग सकता है।

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